गुरुवार, 13 जून को सोशलिस्ट इक्वालिटी पार्टी और वर्ल्ड सोशलिस्ट वेब साइट के अंतरराष्ट्रीय संपादकीय बोर्ड की ओर से यह चिट्ठी वॉशिंगटन डीसी में यूक्रेन के राजदूत ओक्साना मारकारोवा को सौंपी जाएगी।
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मोदी सरकार की रस्मी रियायत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्र प्रदर्शन स्थगित किया
हालात विस्फोटक बने हुए हैं। जब सरकार ने पूरे भारत में फैल रहे विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए किए गए मामूली वादों से भी किनारा कर लिया तब सीजेपी को अपना प्रदर्शन फिर से शुरू करने की धमकी देने पर मजबूर होना पड़ा है।
मतदाता सूची से दसियों लाख ग्रामीण ग़रीब और मज़दूर वर्ग के वोटरों को निकालने के अपने कारनामे के ख़िलाफ़, युवाओं की अगुवाई वाले प्रदर्शनों की लहर को रोकने में, व्यापक सरकारी दमन के बावजूद, भारत की धुर दक्षिणपंथी बीजेपी सरकार नाकाम साबित हुई है।
शनिवार को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से पहले और उसके दौरान देशभर में 7,000 से अधिक और संभवतः 15,000 तक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
भारत के एक प्रमुख अख़बार में छपी एक खोजी रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू-समर्थक सरकार द्वारा मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर अवैध रूप से मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खुलासा होने के बाद पूरे भारत में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
हमले, नस्लवादी डीएचएस 'मिस्टर सिंह' सोशल मीडिया पोस्ट और प्रवासी ट्रक ड्राइवरों पर बढ़ते ख़तरे को लेकर वकील जसजीत सिंह ने बात की.
सत्तारूढ़ भारतीय जानता पार्टी के साथ जुड़े हुए हिंदू श्रेष्ठतावादी गुंडों की एक भीड़ ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जादवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों पर 19-20 अगस्त की रात हिंसक हमला किया.
डब्ल्यूएसडब्ल्यूएस ने नोएडा के मज़दूरों के समर्थन में खड़े एक व्यक्ति से उत्तर प्रदेश सरकार की उस दमनकारी मुहिम पर बात की, जिसमें मज़दूर कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में फंसाया गया, हिरासत में प्रताड़ित किया गया और एनएसए लगाया गया। यह उन लोगों को मिसाल बनाने की निर्मम कोशिश का हिस्सा है, जो गुजारे लायक सैलरी के लिए आवाज़ उठाने की हिम्मत करते हैं।
मौजूदा बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन की तत्काल वजह थी, एक कठोर आतंकवाद-विरोधी कानून के तहत एजेके जॉइंट अवामी (आम लोगों की) एक्शन कमिटी पर राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाना और उसके सौ से ज़्यादा नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी।
इस हफ़्ते विरोध प्रदर्शन तब और ज़्यादा बढ़ गया, जब हज़ारों लोगों ने सरकारी रोक की परवाह किए बिना संसद भवन की ओर मार्च किया। अपनी हिंसक और तानाशाही फितरत के मुताबिक, मोदी सरकार ने ज़बरदस्त पुलिसिया दमनकारी कार्रवाई की।
गणेशदेव की याद और ट्रॉट्स्कीवाद के लिए संघर्ष के प्रति उनका आजीवन समर्पण, श्रीलंका में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्करों और पार्टी कॉमरेडों के बीच हमेशा ज़िंदा बना रहेगा।
वायरल सनसनी की लोकप्रियता और अब कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से नया गठित राजनीतिक आंदोलन, हालांकि, भारत के बेरोज़गार छात्र नौजवानों में गहरी पैठे ग़ुस्से और हताशा को ही दिखाता है, लेकिन सीजेपी उन्हें राजनीति की एक अंधी गली की ओर ही ले जाएगी।
पश्चिम बंगाल की नई बीजेपी सरकार, मज़दूरों को बांटने और ईरान जंग की वजह से पैदा हुई आर्थिक मुश्किलों के बोझ को मज़दूर वर्ग पर डालने के लिए साम्प्रदायिकता, दमन और ग़रीब विरोधी बुलडोज़र अभियानों का इस्तेमाल कर रही है।
लगभग दो महीने हो चुके हैं, सैकड़ों वर्कर हिंसा के फर्जी मामलों और अशांति फैलाने के आरोपों में जेल में बंद हैं, जबकि वे मज़दूर अधिकार कार्यकर्ता एनएसए यानी राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत बिना चार्जशीट दायर किए ही जेलों में बंद हैं, और उन पर प्रशासन ने प्रदर्शन भड़काने का दावा किया है।
इस डॉक्यूड्रामा फ़िल्म को बैन करना, उस रिश्ते की गहराई को दिखाता है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू वर्चस्ववादी सरकार और हत्यारी जॉयनिस्ट नेतन्याहू सरकार के बीच बना है।

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